शिक्षा विभाग में इन दिनों उथल-पुथल मची है। मनचाहे जिले में पोस्टिंग के लिए शिक्षकों ने ऑनलाइन आवेदन करने के बाद जुगाड़ की तलाश भी शुरू कर दी है। राजनीतिक गलियारे से लेकर अफसरों के दरवाजों पर भी इन दिनों शिक्षकों की दस्तक हो रही है। मार्च के दूसरे पखवारे से विभाग ने ट्रांसफर शुरू किया तो कई शिक्षकों ने राजधानी पटना में डेरा ही जमा लिया है। शिक्षिकाओं के परिजन भी कई दिनों से डेरा डाले हुए हैं। पैरवी न मिले तो
कुछ ले-देकर ही काम हो जाए, इसको लेकर भी अधिकतर शिक्षक तैयार हैं। शिक्षकों के ट्रांसफर के लिए दिसंबर में विभाग ने आवेदन लिया था। इसके आधार पर आवेदनों की स्क्रूटनी के बाद अब धीरे-धीरे ट्रांसफर लिस्ट जारी हो रही है। दिव्यांग के साथ पति या पत्नी की पोस्टिंग के आधार पर आवेदन करने वालों की लिस्ट जारी हो चुकी है। वहीं, अब घर के नजदीक जाने वालों की लिस्ट जारी होनी है। सरैया प्रखंड में कार्यरत यूपी के आजमगढ़ की शिक्षिका के पति एक सप्ताह से पटना में जुगाड़ सेट करने
में लगे हैं, ताकि किसी तरह सीमावर्ती जिले में ट्रांसफर हो जाए। वहीं, बीपीएससी से दरभंगा में पोस्टेड मुजफ्फरपुर की एक शिक्षिका के पिता और भाई ने नेताओं के साथ ही विभागीय अधिकारियों के पास भी पैरवी की है। मुजफ्फरपुर सहित कई जिलों के शिक्षकों ने निदेशालय व विभाग के दफ्तर में भी पहुंचना शुरू कर दिया है। इसको लेकर प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि ट्रांसफर की प्रक्रिया सॉफ्टवेयर के माध्यम से पारदर्शी तरीके से पूरी की जा रही है।
निदेशक ने शिक्षकों के साथ अधिकारियों को भी दी चेतावनी
प्राथमिक शिक्षा निदेशक साहिला ने बिना वजह निदेशालय का चक्कर लगाने वाले शिक्षकों के साथ ही सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को भी चेतावनी दी है। निदेशक ने सभी डीईओ को निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके जिले के शिक्षक शैक्षणिक कार्य छोड़कर ट्रांसफर या अन्य स्थापना संबंधी कार्य के लिए अनावश्यक रूप से निदेशालय या विभाग का चक्कर न लगाएं। कहा है कि इससे एक तरफ विद्यालयों में शैक्षणिक कार्य प्रभावित होता है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यालय स्तर पर विभागीय कार्य में भी व्यवधान उत्पन्न हो रहा है।
Post a Comment