तीन माह से वेतन की बाट जोह रहे विशिष्ट बाट जाह रह शिक्षक, आर्थिक तंगी से होने लगी परेशानी
जिले में नियोजित से विशिष्ट शिक्षक बने शिक्षकों पर सिर मुड़वाते ही ओले पड़ने वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। बीते तीन माह से विशिष्ट शिक्षक वेतन की टकटकी लगाए हुए हैं। लेकिन अब तक आधे शिक्षकों का ही वेतन भुगतान हो सका है।
ऐसी स्थिति तब है जब वित्तीय वर्ष समाप्ति में अब सिर्फ एक दिन ही शेष बचे हैं लेकिन विशिष्ट शिक्षकों का वेतन भुगतान अभी भी अधर में लटका हुआ है। साल 2025 की शुरुआत से ही शिक्षकों का वेतन भुगतान सिस्टम के झमेले में उलझ गया है। पहले तकनीकी गड़बड़ी और अब प्राण नंबर के झमेले की वजह से विशिष्ट शिक्षकों को बीते तीन माह से वेतन नहीं मिल रहा। इधर काफी मशक्कत के बाद भी अभी सक्षमता प्रथम चरण में विशिष्ट शिक्षक बने आधे शिक्षकों का ही भुगतान हो पाया है। इसकी वजह से नियोजित से विशिष्ट शिक्षक बने
शिक्षकों की परेशानी बढ़ गई है। उनकी दिनचर्या कठिन दौर से गुजर रही है। बच्चों की पढ़ाई, बीमारी की दवाई, रेंट, इएमआई, राशन, पेट्रोल, परिवहन से लेकर रोजमर्रा के खर्च जुटाने मुश्किल हो गए हैं।
डीईओ का नहीं हो सका है कोड जेनरेट, हो रही परेशानी
विभागीय सूत्रों की मानें तो नई वेतन भुगतान प्रक्रिया में डीपीओ स्थापना मेकर चेकर की भूमिका में होते हैं। जबकि डीईओ अनुवल की। पूर्व डीईओ के निलंबन के बाद वर्तमान में प्रभारी डीईओ का अप्नुवल का कोड अब तक विभागीय स्तर से जेनरेट नहीं हो पाया है। वित्तीय वर्ष समाप्ति को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अनुवल की जिम्मेदारी भी डीपीओ स्थापना को ही मिली हुई है। ऐसे में उनपर वर्क लोड का दबाव है। जिसकी वजह से वेतन भुगतान की प्रक्रिया में अनावश्यक समय लग रहा है।
• शिक्षकों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया जारी है। रविवार को भी काम हो रहा है, रात तक 800 और शिक्षकों के भुगतान की प्रक्रिया पूरी हो सकती है। जुल्द से जल्द सभी शिक्षकों को भुगतान करने का प्रयास किया जा रहा है। - कुमार अनुभव, डीपीओ
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